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सी-बकथोर्न बन सकता है लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़ -डॉ0 तंवर

admin July 17, 2026 1 min read

सी-बकथोर्न बन सकता है लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़ -डॉ0 तंवर
हिमाचल किसान सभा ने की सी-बकथॉर्न मिशन के गठन की मांग


शिमला 17 जुलाई । अखिल भारतीय किसान सभा ने भारत सरकार से राष्ट्रीय हिमालयी सी-बकथॉर्न मिशन के गठन की मांग उठाई। जोकि  लद्दाख में सी-बकथॉर्न के बढ़ते महत्व को देखते हुए की गई है।
अखिल भारतीय किसान सभा के सदस्य एवं हिप्र किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ0 कुलदीप तंवर ने लेह -लादाख के प्रवास के दौरान उस क्षेत्र के किसानों के साथ एक सामूहिक चर्चा के उपरांत मिडिया को जारी बयान में कहा कि  सी-बकथॉर्न लद्दाख की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकता है और पूरे हिमालयी क्षेत्र के टिकाऊ और आत्मनिर्भर विकास की मजबूत नींव रख सकता है। इन्होने  कहा कि लद्दाख को राष्ट्रीय सी-बकथॉर्न उत्कृष्टता केन्द्र के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए। इसके लिए भारत सरकार, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड और जम्मू-कश्मीर की सरकारें मिलकर अनुसंधान, उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन और निर्यात को एक साथ जोड़ते हुए एक राष्ट्रीय मिशन शुरू करें।
डॉ. तँवर ने जारी बयान में कहा कि लद्दाख दुनिया के सबसे मुश्किल इलाकों में से एक है। यहां ऊँचाई बहुत ज्यादा है और मौसम बेहद कठिन है। यहां खेती की जमीन कम है और खेती का मौसम भी बहुत छोटा होता है। ऐसे में किसानों और जनजातीय समुदायों के लिए आजीविका के मौके बहुत सीमित रह जाते हैं।
उन्होने  कहा कि सी-बकथॉर्न के संरक्षण, संग्रहण, खेती, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन पर सबसे पहला और सबसे बड़ा हक लद्दाख के स्थानीय किसानों, महिलाओं, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और जनजातीय समुदायों का होना चाहिए। सरकार की हर योजना का सीधा फायदा इन्हीं लोगों तक पहुंचना चाहिए।
अखिल भारतीय किसान सभा ने मांग की कि लद्दाख के हर बड़े इलाके में ग्राम स्तर के संग्रहण केन्द्र, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयाँ, कोल्ड-चेन, गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाएँ, पैकेजिंग केन्द्र और मजबूत विपणन ढांचा बनाया जाए, ताकि मूल्य संवर्धन वहीं स्थानीय स्तर पर हो और कमाई बाहरी कंपनियों की बजाय स्थानीय लोगों को मिले।
किसान सभा ने केन्द्र को यह भी सुझाव दिया कि लद्दाख, हिमाचल प्रदेश (लाहौल-स्पीति और किन्नौर), उत्तराखण्ड और जम्मू-कश्मीर के बीच अनुसंधान, पौध सामग्री, किसान प्रशिक्षण, प्रसंस्करण तकनीक और सहकारी विपणन के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग बनाया जाए, ताकि पूरे हिमालयी क्षेत्र को इसका फायदा मिल सके। उन्होने कहा कि सी-बकथॉर्न सिर्फ एक औषधीय पौधा या व्यावसायिक फसल नहीं है, बल्कि हिमालयी विकास का एक पूरा मॉडल है। उन्होंने कहा कि एक समर्पित राष्ट्रीय हिमालयी सी-बकथॉर्न मिशन लद्दाख को भारत की सी-बकथॉर्न राजधानी बना सकता है और पूरे हिमालयी क्षेत्र में स्थायी आजीविका का नया रास्ता खोल सकता है।

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