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₹250 करोड़ से अधिक के बकाये पर सिर्फ ₹45 करोड़ जारी करना बागवानों के साथ मज़ाक, ऊंट के मुंह में जीरा : संदीपनी भारद्वाज

admin July 17, 2026 1 min read
₹250 करोड़ से अधिक के बकाये पर सिर्फ ₹45 करोड़ जारी करना बागवानों के साथ मज़ाक, ऊंट के मुंह में जीरा : संदीपनी भारद्वाज
चार साल का भुगतान आज तक नहीं कर सकी कांग्रेस सरकार, बागवानों को राहत नहीं बल्कि छलावा दे रही है सुक्खू सरकार : संदीपनी भारद्वाज
शिमला। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा एमआईएस (MIS) के तहत सेब उत्पादकों के लंबित भुगतान के लिए ₹45 करोड़ जारी करने की घोषणा को बागवानों के साथ छलावा बताते हुए कहा कि यह राहत नहीं, बल्कि “ऊंट के मुंह में जीरा” है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार स्वयं स्वीकार कर रही है कि वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 के एमआईएस भुगतान अब तक लंबित हैं। चार वर्षों तक बागवानों को उनके मेहनत के पैसे से वंचित रखना कांग्रेस सरकार की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक है। आज जब कुल देनदारी लगभग ₹250 करोड़ से अधिक बताई जा रही है, तब मात्र ₹45 करोड़ जारी कर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। इसका अर्थ है कि अभी भी ₹200 करोड़ से अधिक का भुगतान बागवानों पर बकाया रहेगा।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार हर बार बागवानों को घोषणाओं और प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से भ्रमित करने का प्रयास करती है, जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश उत्पादकों को आज भी अपने भुगतान का इंतजार है। यदि सरकार वास्तव में बागवान हितैषी होती तो चार वर्षों तक भुगतान लंबित नहीं रखती और पूरे बकाये का एकमुश्त भुगतान करती।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नई वेबसाइट, मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल का उद्घाटन कर अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि यदि बागवान के खाते में पैसा ही नहीं पहुंचेगा तो पोर्टल और ऐप से उसे क्या लाभ मिलेगा? बागवानों की पहली आवश्यकता समय पर भुगतान है, न कि केवल डिजिटल घोषणाएं।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बागवानी, कृषि अवसंरचना, कोल्ड स्टोरेज, सड़क संपर्क, किसान सम्मान निधि और कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए हैं, लेकिन हिमाचल की कांग्रेस सरकार उन संसाधनों का भी प्रभावी उपयोग करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि सेब हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और लाखों परिवार इससे जुड़े हुए हैं। ऐसे में बागवानों के भुगतान को वर्षों तक लंबित रखना उनकी आर्थिक स्थिति के साथ खिलवाड़ है। भाजपा मांग करती है कि सरकार एमआईएस के तहत बागवानों का पूरा बकाया तत्काल जारी करे, खरीद केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करे और भविष्य में समयबद्ध भुगतान की गारंटी दे, ताकि बागवानों को हर सीजन में अपने ही पैसे के लिए सरकार के सामने हाथ न फैलाने पड़ें।

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