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कौन बनेगा करोड़पति पर छाया राजगढ़ की पझौता घाटी का सिंहटू नृत्य

admin April 5, 2026 1 min read

कौन बनेगा करोड़पति पर छाया राजगढ़ की पझौता घाटी का सिंहटू नृत्य


राजगढ़ 05 अप्रैल । राजगढ़ की पझौता घाटी का प्रसिद्ध सिंहटू नृत्य बारे कौन बनेगा करोड़पति पूछे गए सवाल से सिरमौर की संस्कृति ने  ़एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी एक पहचान बनाई हैं। इस मंच पर इस पारंपरिक नृत्य का जिक्र होना न केवल सिरमौर बल्कि पूरे हिमाचल के लिए गर्व का क्षण बन गया। इससे पहले दिल्ली में 2026 की गणतंत्र दिवस की परेड़ में भी इस नृत्य को प्रस्तुत किया गया।
शो के दौरान महानायक अमिताभ बच्चन ने एक कंटेस्टेंट से सवाल किया कि ‘सिंहटू नृत्य’ देश के किस राज्य का लोकप्रिय नृत्य है?  हालांकि कंटेस्टेंट इस सवाल का सही जवाब नहीं दे पाया, लेकिन इसके बाद जैसे ही सही उत्तर बताया गया, यह नृत्य फिर से चर्चा में आ गया और लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बन गया। इस दौरान अमिताभ बच्चन ने न केवल सही जवाब साझा किया, बल्कि सिरमौर के प्रसिद्ध हाटी समुदाय का भी उल्लेख किया, जिससे इस नृत्य की सांस्कृतिक गहराई और महत्व को और भी पहचान मिली। यह पल दर्शकों के लिए जानकारीपूर्ण होने के साथ-साथ हिमाचल की लोक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला साबित हुआ।
सिंहटू नृत्य सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक है। सिरमौरी बोली में “सिंहटू” का अर्थ शेर का बच्चा होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार शेर मां दुर्गा का वाहन माना जाता है, इसलिए इस नृत्य का धार्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा है। आदिकाल से यह नृत्य देव स्थलों पर विशेष अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता रहा है।
यह नृत्य वर्ष में केवल दो बार, दीपावली और एकादशी के पावन अवसर पर ही किया जाता है। इस दौरान मंदिरों और देव स्थलों से विशेष मुखौटे बाहर निकाले जाते हैं, जिन्हें बेहद श्रद्धा और परंपरा के साथ संभालकर रखा जाता है। नृत्य के दौरान कलाकार सिंह, रीछ, राल और बणमानुष जैसे विभिन्न रूपों के मुखौटे पहनकर प्रस्तुति देते हैं, जो इसे और भी आकर्षक और रहस्यमयी बनाते हैं।
वर्तमान समय में यह नृत्य सिरमौर जिले के मटलोडी कुफ्फर, लेऊ नाना जैसे गांवों में प्रमुख रूप से किया जाता है। हालांकि, इसकी लोकप्रियता अब गांवों तक सीमित नहीं रही। राज्यस्तरीय कार्यक्रमों से लेकर शिमला के रिज मैदान जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी सिंहटू नृत्य की प्रस्तुति दी जाती है, जहां यह दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस नृत्य को पहचान दिलाने में लोक कलाकार जोगिंदर हाबी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके प्रयासों से सिंहटू नृत्य ने विश्व मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
कौन बनेगा करोड़पति जैसे बड़े मंच पर इस नृत्य का जिक्र होना इस बात का प्रमाण है कि हिमाचल की लोक संस्कृति अब केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। सिरमौर का ‘सिंहटू’ एक बार फिर सुर्खियों में हैऔर यह साबित कर रहा है कि हमारी लोक परंपराएं समय के साथ और भी मजबूत होकर उभर रही हैं।

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